भगीरथपुरा में दूषित पानी का कहर: 33 मौतों का दावा, एक परिवार ने दो सदस्य खोए 28 दिसंबर से तेरह दिन में उर्मिला और अलगूराम की मौत, नवजात पोता भी अस्पताल में भर्ती – लोग बोले “पानी नहीं, मौत पी रहे हैं”
इंदौर, मध्य प्रदेश, 5 फरवरी 2026, शाम
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इंदौर के भगीरथपुरा इलाके में दूषित पानी का संकट अब मौत का कारण बनता दिख रहा है। पिछले एक महीने में इलाके से 33 मौतों का दावा किया जा रहा है, जिनमें से ज्यादातर उल्टी-दस्त, पेट दर्द और डायरिया जैसी बीमारियों से जुड़ी हैं। सबसे दर्दनाक मामला उर्मिला यादव और उनके पति अलगूराम यादव का है, जिन्होंने सिर्फ तेरह दिनों के अंतराल में अपनी जान गंवाई।
उर्मिला यादव (मृत्यु: 28 दिसंबर 2025) उर्मिला 15 साल बाद पोते की दादी बनी थीं। पोते का जन्म होने के सिर्फ 10 महीने बाद उनकी मौत हो गई। बेटे संजय ने बताया: “मां बिल्कुल स्वस्थ थीं, कोई पुरानी बीमारी नहीं। 28 दिसंबर की शाम उल्टी हुई, अगली सुबह आईसीयू में थीं और रविवार सुबह चली गईं।”
पोता भी बीमार उर्मिला की मौत के तीन दिन बाद (31 दिसंबर) उनका नवजात पोता बीमार पड़ गया। उसे चाचा नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया। 17-18 बोतल सलाइन चढ़ाने के बाद बच्चा अब घर पर है, लेकिन अभी भी कमजोर है। संजय ने कहा: “15 साल के इंतजार के बाद यह बच्चा आया और मां को उसके साथ एक साल भी नहीं मिला।”
अलगूराम यादव की मौत उर्मिला की तेरहवीं के अगले ही दिन अलगूराम की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें ऑरोबिंदो अस्पताल ले जाया गया। परिवार को मिलने तक नहीं दिया गया। हालत बिगड़ने पर जनरल वार्ड में शिफ्ट किया गया, लेकिन कुछ दिन बाद उनकी भी मौत हो गई।
परिवार का आरोप भांजे विजय यादव ने गुस्से में कहा: “मौसी 28 दिसंबर को चली गईं, 31 को पोता अस्पताल में, तेरहवीं के अगले दिन मौसा बीमार। प्रशासन कह रहा है ‘को-मॉर्बिडिटी’ से मौत हुई, लेकिन अगर ऐसा था तो सरकार ने लाखों का इलाज क्यों वहन किया? पानी दूषित था, नल का पानी गंदा आने लगा था, ड्रेनेज का काम चल रहा था, पाइपलाइन खुली पड़ी थी। शिकायत की, कोई कार्रवाई नहीं हुई।”
प्रशासन का दावा जिला प्रशासन का कहना है कि मौतें दूषित पानी से नहीं, बल्कि मौसमी बीमारियों से हुई हैं। हालांकि इलाके के लोगों और परिवारों का कहना है कि पानी का नमूना जांच में दूषित पाया गया था और मौतों का सीधा संबंध पानी से है।
रेड क्रॉस से सहायता उर्मिला की मौत के बाद परिवार को रेड क्रॉस सोसायटी से 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिली, लेकिन परिवार कहता है कि यह पैसा उनकी जिंदगी वापस नहीं ला सकता।
नीचे घटना से जुड़ी मुख्य फोटो और परिवार की तस्वीर दी गई है:
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