प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2025: भारत 161वें स्थान पर – सुधार या शर्मिंदगी? रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की रिपोर्ट में भारत का स्कोर 36.62, रैंक 161 – 2024 से 2 स्थान नीचे, X पर बहस तेज
नई दिल्ली, 12 फरवरी 2026
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रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) ने 2025 का वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स जारी किया है। भारत इस साल 180 देशों में 161वें स्थान पर है – स्कोर 36.62 (2024 में 38.08 था, रैंक 159)। यानी भारत का प्रदर्शन पिछले साल से और खराब हुआ है।
भारत की स्थिति क्यों खराब?
RSF ने मुख्य कारण बताए:
- पत्रकारों पर हमले और FIR का डर
- मीडिया पर सरकारी दबाव (नोटिस, टैक्स रेड, एड ब्लॉकेज)
- न्यूज चैनल्स पर राजनीतिक प्रभाव
- डिजिटल मीडिया पर सेंसरशिप और IT नियमों का दुरुपयोग
- पत्रकारों की सुरक्षा में कमी (2024 में 4 पत्रकारों की हत्या, दर्जनों पर हमले)
RSF ने भारत को “समस्याग्रस्त” (Problematic) कैटेगरी में रखा है। रिपोर्ट में कहा गया: “भारत में प्रेस फ्रीडम लगातार गिर रही है। पत्रकारों को धमकियां, हमले और कानूनी उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।”
X पर लोग क्या कह रहे हैं?
- “CPI में रैंक 91, प्रेस फ्रीडम में 161 – ये अचीवमेंट नहीं, शर्म है।”
- “लोकतंत्र का चौथा स्तंभ दबाव में है, फिर भी सरकार कहती है सब ठीक है?”
- “पत्रकारों पर हमले बढ़े हैं, लेकिन सरकार रिपोर्ट्स को ‘फर्जी’ कह देती है।”
- “2024 में 4 पत्रकार मारे गए, फिर भी रैंक सुधरने की बात?”
तुलना में स्थिति
- 2014 में भारत का रैंक 140 था (स्कोर 43.17)
- 2020 में 142
- 2024 में 159
- 2025 में 161
यह गिरावट लगातार जारी है। वहीं नॉर्वे, डेनमार्क, स्वीडन टॉप पर हैं।
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