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Friday, February 13, 2026
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मेडिकल सीट्स में आरक्षण बढ़ोतरी: मोदी का दावा 23% से 65% तक – लेकिन हकीकत क्या?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालिया भाषणों में मेडिकल सीट्स में आरक्षण को 23% से बढ़ाकर 65% करने का जिक्र किया है। यह दावा 2021 से चला आ रहा है, जब केंद्र सरकार ने ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में OBC के लिए 27% और EWS के लिए 10% आरक्षण लागू किया। लेकिन क्या यह 65% सही है? आइए फैक्ट्स देखें:

  • आरक्षण का ब्रेकडाउन:
    • AIQ (केंद्रीय कोटा, 15% सीट्स): SC 15%, ST 7.5%, OBC 27%, EWS 10% – कुल ~59.5% आरक्षित।
    • राज्य स्तर पर: कई राज्य (जैसे तमिलनाडु में 69%, महाराष्ट्र में 52%) में कुल आरक्षण 60-85% तक है, जिसमें लोकल कोटा शामिल है।
    • मोदी का “23% से 65%” संभवतः 2014 से पहले के OBC/EWS आरक्षण न होने से तुलना है, लेकिन आधिकारिक रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा सीधे नहीं मिलता।
  • मेडिकल सीट्स की संख्या: 2014 में 50,000 MBBS सीट्स थीं, 2025 में 1,07,948 हो गईं – 115% बढ़ोतरी। PG सीट्स 31,000 से 70,645 हो गईं। लेकिन आरक्षण बढ़ने से जनरल कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, जहां 93% स्कोर वाले भी सरकारी सीट नहीं पा रहे।

SC/ST आरक्षण का 10 वर्ष का विस्तार: संसद ने बिना बहस किया पास

संसद ने 2020 में 104वें संविधान संशोधन के जरिए SC/ST के लिए लोकसभा/राज्य विधानसभाओं में आरक्षण को 2030 तक बढ़ा दिया था। लेकिन क्रीमी लेयर पर कोई बहस नहीं हुई।

  • अंतिम विस्तार: 2019 में लोकसभा ने बिल पास किया, जो 2020 से 2030 तक प्रभावी है। कोई नया 2026 विस्तार नहीं है – यूजर का दावा गलत लगता है।
  • क्रीमी लेयर डिबेट: SC/ST में क्रीमी लेयर लागू नहीं है (केवल OBC में है)। 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST में सब-क्लासिफिकेशन की अनुमति दी और क्रीमी लेयर बाहर करने का सुझाव दिया। फरवरी 2026 में SC ने केंद्र से पूछा: “क्रीमी लेयर SC/ST में क्यों नहीं?” केंद्र से 6 हफ्तों में जवाब मांगा।
  • आरक्षण का इतिहास: अनुच्छेद 334 में शुरू में 10 साल था, लेकिन 10 संशोधनों से 2030 तक बढ़ा। अगला विस्तार 2030 में संभव। बिना क्रीमी लेयर के, लाभ धनी SC/ST परिवारों को जा रहा है – आंकड़े दिखाते हैं कि 2-3 पीढ़ियां लाभ ले चुकी हैं।

क्या है फॉल्ट? – बहस के मुख्य पॉइंट

  • जनरल कैटेगरी का गुस्सा: उच्च स्कोर (93%) वाले छात्र मेडिकल सीट नहीं पा रहे, जबकि आरक्षित कैटेगरी में कम स्कोर पर एडमिशन। यूजर पूछते हैं: “उनका क्या दोष?”
  • प्रोस: आरक्षण सामाजिक न्याय के लिए – ऐतिहासिक अन्याय सुधारने के लिए। SC/ST में 2 पीढ़ियां लाभ ले चुकीं, लेकिन अभी भी सामाजिक भेदभाव है।
  • कॉन्स: मेरिट प्रभावित, स्वास्थ्य जैसे क्रिटिकल सेक्टर में रिस्क। क्रीमी लेयर न होने से लाभ अमीरों को, गरीब SC/ST पिछड़े रहते हैं।
  • सुधार की मांग: SC/ST में क्रीमी लेयर लागू हो, आरक्षण आर्थिक आधार पर हो। बजट 2026 में कोई बदलाव नहीं, लेकिन SC की सुनवाई से उम्मीद।

यह डिबेट राजनीतिक है – BJP IT सेल इसे “सुधार” बताती है, लेकिन विपक्ष और जनरल कैटेगरी इसे “वोट बैंक” कहते हैं।

Disclaimer हम किसी भी न्यूज का समर्थन या विरोध नहीं करते हैं लेकिन आपको दिखाना जरूरी है। यह न्यूज सोशल मीडिया और विभिन्न ऑनलाइन स्रोतों से ली गई है, इसकी आधिकारिक पुष्टि पाठक अवश्य करें। न्यूज पहले से उपलब्ध है इन जगहों पर: Transparency.org, RSF.org, The Hindu, Indian Express, The Wire, NDTV, BBC Hindi, Supreme Court Observer, X.com आदि। आरक्षण जैसे मुद्दों में संयम बरतें, फैक्ट्स चेक करें और समाज में एकता बनाए रखें।

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