भारत का CPI स्कोर 39 क्यों? भ्रष्टाचार सूचकांक में रैंक 91 – कारण और हकीकत पर खुलकर चर्चा ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 2025 रिपोर्ट में भारत का स्कोर 39, रैंक 91 – सुधार तो हुआ, लेकिन अभी भी ग्लोबल एवरेज (42) से नीचे
नई दिल्ली, 12 फरवरी 2026
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ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की Corruption Perceptions Index (CPI) 2025 में भारत ने 2024 के मुकाबले 5 पायदान सुधार किया है – रैंक 96 से 91 और स्कोर 38 से 39। लेकिन सोशल मीडिया पर लोग इसे “अचीवमेंट” नहीं, बल्कि “शर्म की बात” बता रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं: “क्या 39 स्कोर और 91वां स्थान वाकई सुधार है? या यह अभी भी बहुत पीछे है?”
CPI स्कोर कम होने के मुख्य कारण (2025 रिपोर्ट के अनुसार)
- संस्थागत कमजोरियां
- न्यायपालिका में देरी और भ्रष्टाचार के आरोप
- पुलिस और लोकल प्रशासन में रिश्वतखोरी की आम शिकायतें
- सरकारी योजनाओं में लीकेज (MNREGA, PDS, PMAY आदि में भ्रष्टाचार के केस)
- राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता की कमी
- इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई, लेकिन नई पारदर्शी व्यवस्था अभी नहीं आई
- राजनीतिक दलों के फंडिंग सोर्स छिपे रहते हैं
- पत्रकारों और एक्टिविस्ट्स की सुरक्षा
- रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के अनुसार भारत में प्रेस फ्रीडम रैंक 161 (2025)
- भ्रष्टाचार उजागर करने वाले पत्रकारों पर हमले, FIR, और कानूनी दबाव
- प्रशासनिक स्तर पर रिश्वतखोरी
- ट्रैफिक पुलिस, RTO, म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन, बिजली-पानी विभाग में रिश्वत आम
- सरकारी दफ्तरों में फाइल पास करने के लिए “स्पीड मनी”
- कॉर्पोरेट-राजनीतिक गठजोड़
- बड़े कॉर्पोरेट्स पर भ्रष्टाचार के आरोप (Adani, Ambani से जुड़े विवाद)
- कॉर्पोरेट लोन माफ़ी (11 लाख करोड़+ राइट-ऑफ)
सुधार के संकेत भी हैं
- डिजिटल इंडिया और DBT से लीकेज कम हुआ (PDS, MNREGA में डायरेक्ट ट्रांसफर)
- RTI और लोकपाल जैसे संस्थानों का विस्तार
- 2024-25 में ED/CBI की कार्रवाई बढ़ी (कई बड़े केस)
लेकिन X पर लोग कह रहे हैं:
- “रैंक 91 और स्कोर 39 – ये अचीवमेंट नहीं, शर्म है।”
- “राजपाल यादव के 9 करोड़ पर जेल, लेकिन बड़े-बड़े के हजारों करोड़ माफ़ – ये CPI का असली कारण है।”
- “जब तक क्रीमी लेयर और कॉर्पोरेट भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगेगी, रैंक सुधरेगी नहीं।”
Disclaimer हम किसी भी न्यूज का समर्थन या विरोध नहीं करते हैं लेकिन आपको दिखाना जरूरी है। यह न्यूज सोशल मीडिया और विभिन्न ऑनलाइन स्रोतों से ली गई है, इसकी आधिकारिक पुष्टि पाठक अवश्य करें। न्यूज पहले से उपलब्ध है इन जगहों पर: Transparency.org, The Hindu, Indian Express, The Print, NDTV, Times of India आदि। भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों में आधिकारिक रिपोर्ट्स चेक करें और सतर्क रहें।
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