समानता के लिए सुप्रीम कोर्ट मामला: यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस 2026 पर याचिकाएं और चुनौतियां
ट्रेंडिंग चर्चा ताजा खबरें, तेज़ चर्चा 28 जनवरी 2026 | इंदौर, मध्य प्रदेश
यूजीसी के प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 (13 जनवरी अधिसूचित) अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती का सामना कर रहे हैं। ये नियम उच्च शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव (खासकर एससी/एसटी/ओबीसी के खिलाफ) रोकने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ये “रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन” को बढ़ावा देते हैं और सामान्य वर्ग के छात्रों/शिक्षकों को सुरक्षा से वंचित करते हैं।
मुख्य याचिकाएं और चुनौतियां
- मुख्य विवाद: रेगुलेशन 3(c)
- यह नियम “जाति-आधारित भेदभाव” को केवल एससी, एसटी और ओबीसी सदस्यों के खिलाफ होने वाला भेदभाव बताता है।
- याचिकाकर्ताओं का कहना: यह परिभाषा “गैर-समावेशी” (non-inclusionary) है। सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के लोग भी जाति-आधारित उत्पीड़न, ग्रैफिटी, सामाजिक बहिष्कार या फर्जी आरोपों का शिकार हो सकते हैं, लेकिन उन्हें इक्विटी कमेटी, हेल्पलाइन या जांच में कोई सुरक्षा नहीं मिलती।
- इससे अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन होने का दावा। याचिकाएं कहती हैं कि यह “राज्य-प्रायोजित भेदभाव” है और संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ।
- प्रमुख याचिकाएं
- मृतुंजय तिवारी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के पोस्ट-डॉक्टरल रिसर्चर): पूरे रेगुलेशन को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती।
- विनीत जिंदल (एडवोकेट) की याचिका: रेगुलेशन 3(c) पर फोकस। “एंटी-ब्राह्मण” ग्रैफिटी और कैंपस पर सामान्य वर्ग के खिलाफ दुश्मनी के उदाहरण दिए। अंतरिम रोक की मांग कि नियम मौजूदा रूप में लागू न हों और इक्विटी तंत्र सभी के लिए जाति-तटस्थ (caste-neutral) बनाए जाएं।
- राहुल दीवान और अन्य (डायरी नंबर 5477/2026): सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देने का आरोप।
- कुल कम से कम 2-3 याचिकाएं दायर, कुछ में PIL के रूप में।
- सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई (28 जनवरी 2026 तक)
- बुधवार को CJI सूर्या कांत के समक्ष याचिका का उल्लेख हुआ।
- CJI ने जल्द सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई, लेकिन याचिका में खामियां (defects) दूर करने को कहा।
- जल्द सुनवाई संभव, क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने तत्काल सुनवाई की मांग की है।
- अगर कोर्ट रेगुलेशन 3(c) को स्ट्राइक डाउन या संशोधित करे, तो UGC को नियम बदलने पड़ सकते हैं और इक्विटी कमेटियां सभी के लिए खुली हो सकती हैं।
- पृष्ठभूमि
- ये नियम 2012 के फ्रेमवर्क की जगह लेते हैं, जो सलाहकारी थे।
- रोहित वेमुला और पायल तड़वी मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने UGC को सख्त नियम बनाने का निर्देश दिया था (2019 से चल रहा केस)।
- UGC डेटा: 2019-20 से 2023-24 तक जाति-आधारित शिकायतें 118% बढ़ीं।
- विरोध: दिल्ली, लखनऊ, जयपुर आदि में प्रदर्शन; कुछ BJP कार्यकर्ताओं ने इस्तीफे दिए।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि दुरुपयोग नहीं होगा और सभी के साथ निष्पक्षता रहेगी। मामला अभी शुरुआती स्टेज में है—सुनवाई के बाद फैसला आएगा।
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