यूजीसी प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026: विस्तार से समझिए
ट्रेंडिंग चर्चा ताजा खबरें, तेज़ चर्चा 28 जनवरी 2026 | इंदौर, मध्य प्रदेश
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 13 जनवरी 2026 को प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 अधिसूचित किया है। ये नियम 2012 के पुराने एंटी-डिस्क्रिमिनेशन फ्रेमवर्क की जगह लेते हैं और अब सभी उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) पर बाइंडिंग (अनिवार्य) हैं। मुख्य उद्देश्य: उच्च शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव (खासकर एससी/एसटी/ओबीसी के खिलाफ), लिंग, दिव्यांगता, धर्म, जन्म स्थान आदि आधार पर होने वाले भेदभाव को पूरी तरह खत्म करना और समानता, समावेश तथा सम्मान सुनिश्चित करना।
ये नियम नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के समानता और इंक्लूजन के विजन को लागू करने का हिस्सा हैं। पिछले सालों में जाति-आधारित शिकायतों में बढ़ोतरी (2019-20 में 173 से 2023-24 में 378 तक) के बाद ये सख्त कदम उठाया गया है।
मुख्य प्रावधान (की प्रोविजन्स)
- सभी संस्थानों पर लागू: सभी UGC मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी, कॉलेज, डीम्ड यूनिवर्सिटी आदि पर तुरंत प्रभाव से लागू। छात्र, शिक्षक, नॉन-टीचिंग स्टाफ और एडमिनिस्ट्रेटर सभी कवर हैं।
- इक्विटी कमेटी (Equity Committee) अनिवार्य:
- हर संस्थान में 9 सदस्यों वाली कमेटी बनानी होगी।
- इसमें एससी/एसटी/ओबीसी, महिलाएं, दिव्यांग (PwD) और जेंडर माइनॉरिटी के प्रतिनिधि शामिल होने चाहिए।
- कमेटी भेदभाव की शिकायतों की जांच करेगी, निगरानी रखेगी और साल में कम से कम दो बार बैठक करेगी।
- शिकायत मिलने पर 24 घंटे में शुरुआती कार्रवाई और 15 कार्य दिवसों में रिपोर्ट देनी होगी।
- इक्विटी ऑपर्च्युनिटी सेंटर (Equal Opportunity Centre – EOC):
- हर संस्थान में EOC बनाना अनिवार्य।
- यह केंद्र समानता को बढ़ावा देगा, छात्रों को गाइड करेगा, शिकायतें संभालेगा और 24×7 हेल्पलाइन चलाइएगा।
- शिकायतकर्ता की गोपनीयता सुनिश्चित की जाएगी।
- इक्विटी स्क्वाड और अन्य तंत्र:
- इक्विटी स्क्वाड बनाकर कैंपस के कमजोर इलाकों की निगरानी।
- स्टूडेंट एम्बेसडर और प्रिवेंटिव मेजर्स से भेदभाव रोकना।
- बाय-एनुअल रिपोर्ट्स UGC को जमा करनी होंगी।
- संस्थान प्रमुख की जिम्मेदारी:
- संस्थान का हेड (प्रिंसिपल/वाइस चांसलर) सीधे जिम्मेदार होगा।
- भेदभाव होने पर व्यक्तिगत जवाबदेही।
- सजा और पेनल्टी:
- गैर-अनुपालन पर UGC सख्त कार्रवाई कर सकती है: फंडिंग रोकना, नए प्रोग्राम्स की मंजूरी न देना, डिग्री मान्यता वापस लेना या संस्थान को लिस्ट से हटाना।
विवाद और विरोध के कारण
- सामान्य वर्ग के छात्रों का आरोप: नियम “रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन” को बढ़ावा दे सकते हैं, फर्जी शिकायतों का खतरा, असंरक्षित वर्गों के लिए कोई स्पष्ट सुरक्षा नहीं।
- सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं: रेगुलेशन 3(c) को असंवैधानिक बताया गया (केवल एससी/एसटी/ओबीसी आदि को फोकस, जनरल को बाहर)।
- प्रदर्शन: दिल्ली यूजीसी मुख्यालय, लखनऊ, जयपुर आदि कैंपसों पर विरोध। कुछ नेता (जैसे प्रियंका चतुर्वेदी) ने कहा कि यह “एक वर्ग को दोषी मानकर” बनाया गया है।
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान: “दुरुपयोग नहीं होगा, सभी के साथ निष्पक्षता से कानून लागू होगा।”
ये नियम 90 दिनों में लागू करने हैं (अप्रैल 2026 तक कमेटी गठन)। UGC का कहना है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 17 और 46 से जुड़ा है।
डिस्क्लेमर: इसकी पुष्टि सोशल मीडिया पर चल रहे दूसरे न्यूज़ पोर्टल या आधिकारिक बयानों से की गई है लेकिन अगर आपको लगता है कि इसमें संशोधन की जरूरत है तो कृपया हमें सूचित करें, मामले को देखते हुए उसमें तुरंत उचित परिवर्तन किया जाएगा। हम सही खबर देने के लिए हैं न कि गलत खबरों को तूल देने के लिए।
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